झारखंड : खाकी की आड़ में महाघोटाला

झारखंड : खाकी की आड़ में महाघोटाला

खाकी की आड़ में महाघोटाला: सिपाही शंभू ने सिस्टम हैक कर 21 खातों में ट्रांसफर किए ₹28 करोड़; हजारीबाग एसपी ऑफिस में 10 साल तक चला फर्जीवाड़ा

रांची: झारखंड पुलिस के हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में हुए ₹28 करोड़ के सनसनीखेज गबन मामले में सीआईडी (CID) की जांच रिपोर्ट से बेहद चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। वर्दी की आड़ में सरकारी सिस्टम में बैठकर सिपाही शंभू कुमार और उसके साथियों ने करीब 10 सालों तक सरकारी खजाने में सेंधमारी की। रांची स्थित एजेंसी-18 के विशेष न्यायाधीश की अदालत में सीआईडी और अभियोजन पक्ष ने इस डिजिटल महाघोटाले की पूरी परतें खोलकर रख दी हैं।

सीआईडी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की साजिश हजारीबाग एसपी कार्यालय के भीतर ही रची गई थी। आरोपियों ने एसपी कार्यालय के डीडीओ कोड (HZBPOL007) का गलत इस्तेमाल कर पिछले 8 से 10 वर्षों के दौरान लगातार अवैध ट्रांजैक्शन किए।

ऐसे दिया गया घोटाले को अंजाम

जांच में खुलासा हुआ कि कार्यालय में तैयार होने वाले फिजिकल बिल (हार्ड कॉपी) और कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज सॉफ्ट कॉपी के ब्योरे में भारी अंतर रखा जाता था। हालांकि, किसी को शक न हो इसलिए दोनों में दिखाई जाने वाली कुल निकासी राशि एक समान रखी जाती थी। मास्टरमाइंड सिपाही शंभू कुमार ने अपने साथी सिपाही रजनीश सिंह उर्फ पंकज सिंह और धीरेंद्र सिंह के साथ मिलकर कंप्यूटर डेटा में हेरफेर की और सरकारी फंड को निजी खातों में डायवर्ट कर दिया।

वित्त विभाग के पीएफएमएस (PFMS) ट्रेजरी डेटा विश्लेषण में सामने आया कि शुरुआत में बिहार के गया स्थित एसबीआई अनुग्रह कॉलोनी शाखा के दो खातों में सीधे ₹15.41 करोड़ ट्रांसफर किए गए थे। इनमें से एक खाता खुद सिपाही शंभू का और दूसरा संगीता चौधरी के नाम पर था। सीआईडी की तकनीकी जांच में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक के कुल 21 खातों का सिंडिकेट बनाकर सरकारी खजाने से लगभग ₹27 से ₹28 करोड़ की भारी-भरकम राशि अवैध तरीके से उड़ाई है। अदालत ने इसे लोक सेवकों द्वारा पद का दुरुपयोग कर किया गया गंभीर आपराधिक कृत्य माना है।